मेरा हमसफ़र बनोगी

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जोर से बोलो वेलिनटाइन बाबा की जय……….
बरबादी के देवता की………..जय हो
गॉड ऑफ लव की……

पहले मैंने सोचा कि ये ब्लॉग लिख तो लिया है मगर पोस्ट करूँ या न करूँ…..संशय में था…

तभी मेरे दोस्त ने मुझसे कहा “””सोमू तू लिख क्योंकि लेखक स्वतंत्र होता है💪💪🙏

बस इत्ता सुनकर हमाये विश्वास को बल मिला।।।

ये ब्लॉग लिखने की वजह भी मेरे दोस्तों का कहा है
और इस ब्लॉग से दूर दूर तक मेरा कोई भी सम्बन्ध नहीं है…………

भावो पर ध्यान दें बाक़ी प्रोफाइल देखनी हो लिखने वाले बन्दे की तो नीचे क्लिक करे प्रोफाइल पर😀😀😎😎😎😎😎😎

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एक बात कहूँ………..बहुत दिनों से कहनी थी तुमसे……..

हम खुद से भी ज्यादा तुमको पसन्द करते हैं😍😘❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️

तुम जानती हो कंही न कंही से हम एक है……हमारी मंजिल भी एक है बस आज तक रास्ते अलग थे………
तुम्हें देखकर न जाने क्यों मुझे अपनापन सा लगता है…….💏💟💝
दिल को सुकून और मेरी चाहत को राहत मिलती है
तू मुझे इसलिए भी अच्छी लगती है क्योंकि मुझे अपने जैसे लोग अच्छे लगते हैं…….
तू जिन्दगी क्या है ये समझ रही है और
मैं जिन्दगी के तजुर्बो से वाकिफ हूँ😎💪💪👷👷
जब हमारी मंजिल एक है तो क्यों न हम अपने रास्ते भी मोड़ ले,चले एक साथ,पकड़ एक दूसरे का हाथ,एक दूसरे के हमसफर बनकर इस जिन्दगी के सफ़र को सुहाना बनायें……

जंहा मजबूरियाँ न हों,हम तुम में दूरियाँ न हों, फासले न हों,गलतफहमियां न हों,बस खुले आसमान में झिलमिल सितारे हों…….उसके नीचे बस हम तुम हो….एक छोटा सा घर हो…तितलियों से भरा आँगन हो……
तुम ही हो जो मेरे अकेलेपन को महसूस करती हो…….😄😴😔😔👲
😞😞😞😨😨😨😨😨😨😨😨😨😨😨😨😨😨😨😨😨😨😨😨😨😨😨😨😨😨😨😨😨😨😨😨😨😨😨😨😨😨😨

ये बातें महज बातें नहीं हैं…बेजुबाँ हैं मगर कोरे पन्नो पर उतरकर आया मेरा दर्द है….जो मुझे यकीन दिलाता है कि मैं खुश हूँ…..हाँ जी रहा हूँ…जिन्दा हूँ कंही न कंही……..

तुम जानती हो तुम्हारे कदमो की आहत से मैं जान जाता हूँ कि ये तुम हो…..हाँ तुम हो…….
यहीं कंही मेरे आस पास……..

तुम अहसास हो मेरी जिन्दगी का…..तुम सुकून हो मेरी बन्दगी का……
मैं ये नहीं कहता कि तुम मेरी जिन्दगी हो….
हाँ…..मगर तुम मेरी जिन्दगी में अहम हो….
हाँ…..तुम मेरी जिन्दगी में हो…..लेकिन जिन्दगी नहीं….क्योंकि हर कोई किसी की जिन्दगी में होता है ……जिन्दगी नहीं होता………हाँ……….

एक और बात….जो तुमसे कहनी थी…..
तुमसे पूछनी थी…….
दर्द तो पहले भी उठता था मेरे सीने में..जुबाँ भी थी,मगर अल्फाजों का समन्दर अब बह रहा है
सब्र का बांध अब टूटा है

अच्छा नहीं लगता जब तुम किसी और से बात करती हो….
दिल में एक बेतुकी सी चुभन होती है जब लगता है तुम किसी और से प्यार करती हो…..किसी गैर को चाहती हो….😨😨😨😨😰😰😰😰

हाँ……मैं खामोश रहता हूँ,मगर अनजान नहीं हूँ…
बेवजह नहीं रूठता हूँ तुमसे,बस तेरी फिक्र करता हूँ…
तुमसे बात करते वक्त लगता है जैसे तुमसे समझदार इस दुनियाँ में कोई नहीं😛😛😍😍

तेरे तसव्वुर से मेरी रूह को करार है…
पता नहीं ये दोस्ती या प्यार है…..
मगर जो भी है जैसा भी है…बड़ा मजेदार है।।।

एक लगाव सा हो गया है तुझसे,तुझको भुलाया भी नहीं जाता,तुझसे दूर जाया भी नहीं जाता….

हाँ….थोड़ा पागल हूँ…माना तेरे काबिल नहीं
सहमा हुआ सा हूँ,थक गया हूँ मगर मैं रुका नहीं
बस….सवालों का जमावड़ा है,ढेरों जज्बात हैं..यादों का पुलिंदा लिए जब सवेरे सवेरे आँखे खोलता हूँ तो इस वीरान सी दुनिया में खुद को अकेला पाता हूँ

तुम्हें पता है मुझे अंधेरों से डर लगता है क्योंकि मैं वाकिफ नहीं हूँ इनकी गहराई से….
अनजान राहों पर भटकता हूँ अनजान बनकर,अनजाने लोग मिलते हैं इस भीड़ से भरी दुनियाँ के व्यस्त चौराहों पर……
एक सिसकती सी आवाज आती है अन्दर से…तुझे खो न दूँ कंही मैं….बिछड़ न जाऊ तुझसे

तेरे साथ का सफ़र यंही खत्म न हो जाये😅😅😞😞

क्या तुम मेरी हमसफ़र बनोगी😍😍😍😍

नाम में बहुत कुछ रखा है…….
सोमिल जैन “”””सोमू””””””

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युग में नई पहल🙋

आज मानुष गिर गया है,चन्द्र पैसो के लिए वह।
असमंजस में घिर गया है,चन्द्र सुविधा के लिए वह।
आज रिश्ते टूटते हैं,अपनों के अपनों के द्वारा।
वेवजह ही रुठते हैं ,कभी रिश्ता था जो प्यारा।
तू मुसाफिर सो रहा है,पल ही पल क्यों रो रहा है।
नहीं लगता है जगासा,हर समय क्यों है उदासा।
पूछता हूँ ये समंदर,छिपे मोती तेरे अन्दर।
बता कितने ढूढ़ता में,वेवजह क्यों डूबता में।
ऐ हवा पुलकित फिजा,ऐ मेरे परवरदिगार।
ऐ मेरे दिल तू बता, क्या तुझे है इनका पता।
रुक मुसाफिर अब सम्हल जा,चेत कर फिर से बदल जा।
रहो सबके साथ मिलकर,यही मतलब इस पहल का।
जाग उठ और खड़े हो,तुझमें छुपा है नूर सा।
ऐलान कर दे इस जंहा को,बनजा तू कोहिनूर सा।
दिखादे अपनी दिलासा,फहरा दे अपनी पताका।
मुश्किलो में नहीं डरना जीत जायेगा जंहा को।
सत्य पालेगा अगर तू मुश्किलो से लड़ेगा तू।
बनेगा तू एक सम्मा और बनके जलेगा तू।
दोस्त बनकर सभी से रह,बैर की न हो निशानी।
प्यार के अल्फाज निकलें चेन से हो हर कहानी।
क्यों न हम रिश्ते बनाये,खुशनुमा दीपक जलाये।
प्रेम की छाया में रहकर, क्यों न हम मंडप सजायें।।।

सोमिल जैन “सोमू”

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एक नन्हा दीपक😰😍

इन काली काली रातों में,एक नन्हा दीपक जलता है।
मगर अफ़सोस वो बेजुबाँ,क्यों बिखरा बिखरा रहता है,क्यों उखड़ा उखड़ा रहता है।

इन गम के तुफानो में,कंही महफूज पलता है।
सांसे न रुक जाएँ कभी,लहरों से बचकर छिपता है,लहरों से बचकर जलता है।
इन काली काली……….

एक दिन ऐसा हुआ,नजदीक आया छोटा दिया।😝
मुस्कुराते हुए पूछा- बड़े भाई क्या हुआ।
लहरों तूफान भवन्दर से,उसका यह रूप सिसकता है।
इन काली काली………….

डर लगता है चट्टानों से,इन लहरों से तूफानों से।
पल पल उसको बुझने का,ये दर्द दिलों में पलता है।
इन काली काली……..

छोटे दिए ने हंसकर कहा-
बड़े भाई अंत तो होना है।
जो जला आज कल बुझना है।
ये सोच,सोच क्यों रखता है।
जो होना है सो होता है।

शम्मा है तू परवाना है अपनी मंजिल भी पाना है।
खुद में विश्वास जगा ले तू,वापिस फिर कोई न आता है।
इन काली काली…….
सोमू

वो पल आँसू दे जाते हैं…😭

वो पल आंसू दे जाते हैं😅😨😧😩

हम कई यादे छोड़ जाते हैं कई अधूरी बातें छोड़ जाते हैं ।।।।।
जो न हुयी,
शायद न होनी थी,
वो मुलाकातें छोड़ जाते हैं।

कुछ यादें दरिया बन जाती है, कुछ दिल के समंदर में समां जाती हैं।
बस हम तो किनारें पर चमकती सीपियाँ छोड़ जाते हैं।
पता नहीं आँखे नम क्यों हो जाती हैं।
पता चलती है आंसुओ की गर्माहट तब का जब वे आँख से हाथ पर आ जाती है
शायद अब यंहा आना कभी न हो।
इस मोसम में अपनापन फिर न हो।
वो बीता कल वापिस न आये।
गुजारे हुए पल बापिस न आये।

मगर जीते है इसी उम्मीद से की काश वो लम्हें फिर लोट आये😨😨😨😨😨😨

😧सोमू

मेरी कहानी……

पूछता हूँ ये समां से,पूछता हूँ ये अमां से।

यदि फुर्सत हो तुम्हें तो,पूछता हूँ ये जमां से।

क्या यही मेरी कहानी क्यों सजा आँखों में पानी……………………।

 

मैं भी था एक सुखी मानुष,थोड़ा चंचल बहुत ख्वाहिश।

मिले सब संयोग मुझको,मगर ये क्या हुआ तुझको।

एक दिन सब टूट बिखरा,अंधकारी सूर्य उखरा।

छोड़ कर चल दिए मुझको ,सम्हालेगा कौन मुझको।

आज हारा हूँ कभी में,जो न होता खेल खेला।

पूछता हूँ हाथ मेरा,छोड़ क्यों छोड़ा अकेला।

ले ली सबने साँस ठण्डी,भूलकर जलती कहानी।

आग है उर में मेरे,क्यों सजा आँखों में पानी।

 

पर में ये सब भूलता हूँ,अपनी मंजिल ढूड़ता हूँ।

राज खोलूं गर यदि में,जी रहा हूँ सबके बिन में।

आज करुणा मेरे मन में,घ्रणा से क्यों भरे है वे।

हुआ क्यों पाषाण व्यक्ति,क्यों बड़ी मेरी आसक्ति।

क्यों न मन की बात में,अगर मन में रहने देता।

न में उनसे बोलता तो,अकेला हो क्यों में रोता।

 

क्या में ऐसे जी सकूँगा,आंसुओ को पी सकूँगा।

न रही अब एक आशा,हर कदम पर है निराशा।

 

पर जीऊंगा फिर उठूँगा,रहूँगा में क्यों उदाशा।

जाने क्यों में खो रहा हूँ,मन ही मन क्यों रो रहा हूँ।

 

क्या सही है सोचना यह,भुला देगा क्या मुझे वह।

क्या चलूँगा बनके बेबस,यही बस तो बहुत है बस।

 

रवि बनकर जलूँगा में,एक ज्वाला बनूँगा में।

बुझुगा न जलूँगा में,नेकपथ पर चलूँगा में।

मुश्किलो को छोड़कर,मंजिल तरफ मुंह मोड़कर।

सपने सभी परिवार के,पूरा करूँ जिद छोड़कर।

 

चाहे जितना कंप हों ले,चाहे कोई प्रलय होले।

उठूँगा तूफान बनकर, चाहे अलसित व्योम रो ले।

मैने अपने अश्रुकण को,पोंछकर मेने सुखाया।

जिन्दगी की हकीकत को,समझकर खुद को जगाया।

 

चाहे सम्मा बनके जलना,पड़ेगा तो जलूँगा में।

कांटे आयें चाहे पत्थर,बिना डरके चलूँगा में।

 

सहनता मेरी निशानी,बस यही मेरी कहानी।

हो मुकम्मल ख्वाव मेरे,क्यों सजे आँखों में पानी।

सोमू

 

 

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इस वतन के वास्ते……

जर जमीन एक करदी,इस वतन के वास्ते।
खून से कस्तियाँ लिख दी,इस वतन के वास्ते।
हँसते हँसते सूली चढ़ गये, इस वतन के वास्ते।

गोलियां सीने पर झेली, इस वतन के वास्ते।
खून की होलियाँ खेली इस वतन के वास्ते।
खून से लिख दी फतह भी,इस वतन के वास्ते।

उफने दिल ने मांगी आजादी इस वतन के वास्ते।
कट गये पर न झुके सिर,इस वतन के वास्ते।
हँसते हँसते जाँ गवा दी,इस वतन के वास्ते।

########@@@@@@सोमू